
Astrologic Desk | Pandit Himanshu Sharma ji ke anusar
दीपावली की रौनक धनतेरस से ही शुरू हो जाती है। घरों की सफाई, दीपों की सजावट और नए सामान की खरीदारी के बीच यह पर्व हमें धन के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य, संतुलन और कृतज्ञता का महत्व भी याद दिलाता है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
इस वर्ष धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं धनतेरस 2026 की तिथि, देहरादून के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, इस दिन क्या खरीदना शुभ माना जाता है और धनतेरस से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं।
धनतेरस 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
धनतेरस की तिथि: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026, सुबह 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
- प्रदोष काल (देहरादून): शाम 5:27 बजे से रात 8:05 बजे तक
- धनतेरस पूजा मुहूर्त (देहरादून): शाम 5:56 बजे से 7:50 बजे तक
- पूजा मुहूर्त की अवधि: लगभग 1 घंटा 55 मिनट
ध्यान दें: ऊपर दिया गया पूजा मुहूर्त देहरादून के स्थानीय पंचांग के अनुसार है। सूर्यास्त और लग्न में अंतर के कारण दूसरे शहरों में समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अपने शहर के अनुसार स्थानीय पंचांग अवश्य देख लें।
धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
धनतेरस पर मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन किया जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का अधिष्ठाता माना जाता है। माता लक्ष्मी समृद्धि और शुभता की प्रतीक हैं, जबकि भगवान कुबेर को धन-संपदा का संरक्षक माना गया है। कई परिवारों में इस दिन भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है।
धनतेरस पूजा विधि: घर पर कैसे करें पूजन?
धनतेरस की पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और सात्त्विक भाव का विशेष महत्व है। घर की पूजा परंपरा के अनुसार आप सरल विधि से पूजन कर सकते हैं:
- घर और पूजा स्थल को साफ करके दीपक जलाएं। मुख्य द्वार के आसपास भी स्वच्छता रखें।
- पूजा चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- जल, अक्षत, पुष्प, रोली, चंदन, फल और मिठाई अर्पित करें।
- माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
- भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना करें।
- परिवार की परंपरा के अनुसार आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
पूजन के दौरान आप श्रद्धापूर्वक “ॐ धन्वन्तरये नमः” और “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्रों का जाप कर सकते हैं। मंत्रों का उच्चारण अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार करें।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर खरीदारी की परंपरा केवल सोना-चांदी तक सीमित नहीं है। मान्यता है कि इस दिन घर में उपयोगी और शुभ वस्तुएं लाना समृद्धि तथा मंगलकामना का प्रतीक है। अपनी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुसार इनमें से कुछ वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं:
- सोना और चांदी: आभूषण, सिक्के या छोटी चांदी की वस्तु खरीदना कई परिवारों में शुभ माना जाता है।
- बर्तन: पीतल, तांबे, कांसे या स्टील के नए बर्तन खरीदने की परंपरा है।
- धनिया के बीज: कुछ क्षेत्रों में साबुत धनिया खरीदकर पूजा में रखने और बाद में बोने की परंपरा है।
- झाड़ू: झाड़ू को स्वच्छता और घर की नकारात्मकता दूर करने के प्रतीक के रूप में खरीदा जाता है।
- लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा: दीपावली पूजन के लिए नई प्रतिमा या चित्र लिया जा सकता है।
- दीपक और पूजा सामग्री: मिट्टी के दीपक, धूप, घी, बाती और अन्य पूजन सामग्री भी खरीदी जाती है।
एक जरूरी बात: धनतेरस पर खरीदारी को अपनी आर्थिक स्थिति और वास्तविक जरूरत के अनुसार रखें। सोना या महंगी वस्तु खरीदना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और विवेकपूर्ण खर्च भी इस पर्व के महत्वपूर्ण संदेश हैं।
धनतेरस पर यम दीपदान का महत्व
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे यम दीपदान या यमदीप कहा जाता है। मान्यता के अनुसार घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और मंगल की प्रार्थना की जाती है। इसे प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार दीपदान करें और दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें।
धनतेरस की पौराणिक कथा: समुद्र मंथन से प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि
पौराणिक मान्यता के अनुसार देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए क्षीरसागर का मंथन किया था। इस समुद्र मंथन से अनेक दिव्य रत्न और वस्तुएं प्रकट हुईं। इसी दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है।
भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की स्मृति में कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धन्वंतरि जयंती या धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए यह दिन केवल धन-संपत्ति की कामना का नहीं, बल्कि आरोग्य और दीर्घायु के महत्व को याद करने का भी अवसर है।
यम दीपदान की कथा
धनतेरस से जुड़ी एक लोकप्रिय लोककथा राजा हेम के पुत्र से संबंधित है। कथा के अनुसार ज्योतिषीय गणना में राजकुमार की विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग बताया गया था। विवाह के बाद उसकी पत्नी ने उस रात उसे सोने नहीं दिया। उसने घर के द्वार पर दीप जलाए, आभूषण और धातु की वस्तुएं सजाईं तथा गीत-संगीत से वातावरण को जागृत रखा। मान्यता है कि जब यमराज सर्प रूप में वहां पहुंचे, तो दीपों के तेज और प्रकाश के कारण वे भीतर प्रवेश नहीं कर सके और राजकुमार का जीवन बच गया।
इसी लोकमान्यता के आधार पर धनतेरस की संध्या यम दीपदान किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस कथा के विवरण और पूजा की परंपराओं में अंतर मिल सकता है।
पंडित हिमांशु शर्मा जी के अनुसार धनतेरस का वास्तविक संदेश
पंडित हिमांशु शर्मा जी के अनुसार, धनतेरस को केवल खरीदारी या धन-संग्रह के पर्व के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा हमें याद दिलाती है कि अच्छा स्वास्थ्य भी सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक है। माता लक्ष्मी की आराधना के साथ घर में स्वच्छता, सद्भाव, परिश्रम और धन के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को भी स्थान देना चाहिए।
धन का सही उपयोग, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, जरूरतमंदों की सहायता और अपने कर्मों में ईमानदारी—ये सभी ऐसे मूल्य हैं जो जीवन में स्थायी समृद्धि का आधार बनते हैं। इसलिए इस धनतेरस पर दीप जलाने के साथ अपने जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मकता का संकल्प भी लें।
धनतेरस 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
देहरादून में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
देहरादून के लिए धनतेरस पूजा मुहूर्त शाम 5:56 बजे से 7:50 बजे तक है। दूसरे शहरों के श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखें।
धनतेरस पर किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। कई परिवार भगवान गणेश का पूजन भी करते हैं।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना जरूरी है?
नहीं। सोना खरीदना अनिवार्य नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार चांदी, बर्तन, दीपक या पूजा सामग्री लेना भी परंपरा का हिस्सा है।
यम दीपदान कब करना चाहिए?
यम दीपदान धनतेरस की संध्या प्रदोष काल में करने की परंपरा है। देहरादून में प्रदोष काल शाम 5:27 बजे से रात 8:05 बजे तक है।
Astrologic की ओर से आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं। माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की कृपा से आपके घर में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि बनी रहे।
पंचांग संदर्भ: Drik Panchang – Dehradun, Dhanteras 2026. पूजा का मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है।
ऐसे ही अन्य व्रत और त्योहारों की जानकारी के लिए Astrologic का त्योहार विशेष सेक्शन भी पढ़ें।


